चौकीदार, ड्राइवर और प्रोफ़ेसर धर्मेंद्र
चुपके चुपके उस जॉनर की फ़िल्मों की बेहतरीन मिसाल है, जिसमें कॉमेडी है लेकिन ये न फूहड़ है, न इसमें डबल मीनिंग डायलॉग हैं. फ़िल्म जिसमें हँसी के फ़ुव्वारे और सादगी है. गुलज़ार के स्क्रीनप्ले वाली इस फ़िल्म की कहानी साधारण-सी है. बॉटनी के प्रोफ़ेसर परिमल त्रिपाठी (धर्मेंद्र) और बॉटनी की छात्रा सुलेखा (शर्मिला टैगोर) … Read more